गरोठ में कौन हिंदू… कौन हिंदू विरोधी… अब सोशल मीडिया की ठेकेदार गैंग करेगी फैसला..?
जब रिसाला की 5 करोड़ की जमीन मुक्त हुई तब नहीं जागा धर्म प्रेम, अब कार्रवाई अपने दरवाजे पहुंची तो हिंदू खतरे में का शोर..!
कब पोस्ट डालनी है, कब माहौल गर्म करना है, कब किसे हिंदूवादी और कब किसे हिंदू विरोधी घोषित करना है गरोठ में कुछ चेहरे अब यही एजेंडा सेट कर रहे हैं..!
राकेश ग्वाला
गरोठ न्यूज़ एक्सप्रेस
विशेष विश्लेषण
गरोठ में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक खतरनाक खेल चलता दिखाई दे रहा है। कुछ तयशुदा चेहरे अब खुद को हिंदुत्व का ठेकेदार मान बैठे हैं। ऐसा लगता है मानो गरोठ की जनता नहीं, बल्कि यही लोग तय करेंगे कि कौन हिंदू है, कौन हिंदू विरोधी है और किस समय किस मुद्दे पर धर्म का कार्ड खेलना है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर परिषद अध्यक्ष राजेश सेठिया ने रिसाला क्षेत्र में करीब 5 करोड़ की जमीन अतिक्रमण मुक्त करवाई थी, तब इनका हिंदू प्रेम आखिर कहां सो रहा था..?
जब सिकंदर मुकुंदन क्षेत्र के सामने मुस्लिम समुदाय से जुड़ी करीब 3 करोड़ की जमीन मुक्त हुई, तब यह तथाकथित धर्म योद्धा चुप क्यों थे..?
जब कार्रवाई के दौरान पत्थर चल रहे थे, माहौल बिगड़ रहा था, तब कौन-सा धर्म खतरे में नहीं आया था..? लेकिन जैसे ही कार्रवाई कुछ खास लोगों और उनके हितों तक पहुंची, अचानक सोशल मीडिया पर पोस्टों की बाढ़ आ गई।
अब वही चेहरे वीडियो बनाकर, भावनात्मक शब्दों का सहारा लेकर और धर्म का चोला पहनकर जनता को भड़काने में जुट गए हैं।
ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरा एजेंडा पहले से तैयार रहता हो
कब पोस्ट डालनी है…
कब फेसबुक लाइव करना है…
कब हिंदू खतरे में लिखना है…
कब भीड़ को भावनात्मक करना है…
और कब किसी को हिंदू विरोधी घोषित करना है।गरोठ में कुछ लोगों ने मानो धर्म को भी राजनीति का टूल बना दिया है।जहां निजी स्वार्थ टकराए, वहां अचानक हिंदुत्व जाग जाता है।जहां अपनी दुकान बचानी हो, वहां धर्म खतरे में आ जाता है।
लेकिन जब नगर हित में कार्रवाई होती है, करोड़ों की सरकारी जमीन मुक्त होती है, तब यही लोग चुप्पी साध लेते हैं।
विडंबना देखिए…जब नगर परिषद अध्यक्ष और जनप्रतिनिधियों पर अभद्र टिप्पणियां होती हैं, तब इन्हें संस्कृति याद नहीं आती।
जब सोशल मीडिया पर गालियां दी जाती हैं, तब धर्म नहीं जागता।
लेकिन अतिक्रमण हटते ही अचानक कुछ चेहरे खुद को धर्म का सबसे बड़ा सिपाही बताने लगते हैं।
गरोठ की जनता अब समझने लगी है कि यह लड़ाई गुमटी की कम और राजनीति की ज्यादा है।
यह विकास रोकने, कार्रवाई दबाने और भावनाएं भड़काकर माहौल खराब करने का खेल दिखाई दे रहा है।जरूरत इस बात की है कि जनता ऐसे एजेंडों को पहचाने।
क्योंकि अगर हर प्रशासनिक कार्रवाई को धर्म का रंग देकर भीड़ भड़काई जाएगी, तो आने वाले समय में कोई भी जनप्रतिनिधि शहर हित में कठोर फैसला लेने की हिम्मत नहीं करेगा।


